पटवारी आत्महत्या मामला, नायब तहसीलदार को किया निलंबित, दिनभर चला धरना, शाम को कराया पोस्टमार्टम

- सात दिन में जांच का दिया आश्वासन, सैलाना विधायक ने की एसआईटी से जांच की मांग, 23 अप्रैल को पटवारी संघ सौंपेगा ज्ञापन

पटवारी आत्महत्या मामला, नायब तहसीलदार को किया निलंबित, दिनभर चला धरना, शाम को कराया पोस्टमार्टम
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✍  सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।   
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की आलोट तहसील के पटवारी रविशंकर खराड़ी द्वारा आत्महत्या करने के मामले में नायब तहसीलदार को निलंबित करने व उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर परिजन, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों व पटवारियों ने मेडिकल कॉलेज में बुधवार दिनभर धरना दिया। दोपहर में प्रशासन ने नायब तहसीलदार सविता राठौर को निलंबित कर दिया। इसके बाद भी धरन पर बैठे लोग एफआईआर करने की मांग पर अड़े रहे। शाम करीब पौने पांच बजे अधिकारियों ने सात में जांच कर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद धरना समाप्त कर मृतक पटवारी के शव का पोस्टमार्टम कराया और शव अंतिम संस्कार के लिए ले गए। उधर, सैलना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने एसपी को पत्र लिखकर मामले की जांच एसआईटी से कराने की मांग की।

     उल्लेखनीय है कि अलोट तहसील के हल्का नंबर 34 (खजूरी सोलंकी) में पदस्थ पटवारी 33 वर्षीय रविशंकर खराडी ने रतलाम शहर के एमबी नगर में स्थित अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पटवारी के पास से पुलिस को एक पत्र मिला था, जिसमें लिखा था कि मेरे ऊपर नायब तहसीलदार सविता राठौर द्वारा काम के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पहले भी उनके द्वारा नक्शा बंटाकन की मौका रिपोर्ट, पंचनामा, बंटाकन फर्द दबाव बनाकर चेंज कराई गई थी। नायब तहसीलदार द्वारा दबाव डालकर काम कराने के कारण में अपने छोटे भाई की शादी में भी ध्यान दे नहीं पाता हूं। कई परिचितों को पत्रिका देने का समय भी नहीं मिल पाया था। नायब तहसीलदार द्वारा कई बार मुझे अपने क्वार्टर पर बुलाकर यह भी कहा गया था कि भाई की शादी अच्छे से नहीं होने देगी। मेरे विरुद्ध कारण बताओ नोटिस निकाला जा रहा है। नायब तहसीलदार के साथ मैं दबावपूर्ण नौकरी नहीं कर सकता हूं। पटवारी के आत्महत्या की खबर फैलने पर बड़ी संख्या में पटवारी मेडिकल कालेज पहुंचे थे। रात नौ बजे पटवारी संघ की बैठक हुई थी और रात करीब सवा दस बजे बड़ी संख्या में पटवारी औद्योगिक क्षेत्र थाने पहुंचकर नायब तहसीलदार को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए  थे। कुछ देर बाद एसडीएम आर्ची हरित व तहसीलदार पिंकी साठे ने पटवारियों के बीच पहुंचकर बातचीत की और कलेक्टर के पास चलकर चर्चा करने के लिए कहा था लेकिन पटवारी नहीं माने। विधायक कमलेश्वर डोडियार भी थाने पहुंचे और समर्थन में धरने पर बैठ गए। विधायक डोडियार ने कहा कि पटवारी रविशंकर को लगातार सताया गया, तंग किया गया, उसे उकसाया गया जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली। पटवारी संघ धरने पर बैठा है, वे उनके समर्थन में आए है, नायब तहसीलदार के निलंबन व एफआईआर नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आवश्यक हुआ तो मामला विधानसभा में भी उठाया जाएगा। आधी रात प्रशासन ने नायब तहसीलदार को आलोट से हटाकर रतलाम के भू अभिलेख कार्यालय में पदस्थ कर दिया था लेकिन फिर भी पटवारी नहीं माने। बुधवार सुबह साढ़े चार बजे तक थाने पर धरना चला।  
             एफआईआर व निलंबन नहीं होने तक
                पोस्टमार्टम कराने से किया मना
    बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे परिजन और बड़ी संख्या में पटवारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। पुलिस ने मृतक पटवारी का पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा तो परिजन ने कहा कि पहले नायब तहसीलदार को निलंबित कर एफआईआर की जाए, उसके बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसी बीच सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा, दिनेश माल चंदू मईड़ा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी व समजाजन भी पहुंचे तथा परिजन व पटवारियों के साथ धरने पर बैठ गए। कुछ देर बाद करणी सेना परिवार के जीवनसिंह शेरपुर भी  पहुंचे तथा धरने में शामिल हुए। एडीएम शालिनी श्रीवास्तव, एसडीएम आर्ची हरित, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया, थाना प्रभारी सत्येंद्र रघुवंशी आदि ने धरना दे रहे लोगों से चर्चा। एसडीएम द्वारा अनुग्रह राशि की बात करने पर परिजन नाराज हो गए तथा कहने लगे कि हमें रुपए नहीं, कार्रवाई चाहिए।
                  दोपहर में किया निलंबित
     प्रशासन द्वारा दोपहर में नायब तहसीलदार को निलंबत कर दिया गया। इसके बाद अधिकारी पुन: धरना समाप्त कराने के लिए पहुंचे तो धरने पर बैठे लोग नहीं माने और कहने लगे की एफआईआर भी दर्ज करें, तब धरना समाप्त कर पोस्टमार्टम कराया जाएगा। शाम करीब पौने पांच बजे अधिकारियों व धरना दे रहे लोगों के बीच पुन: वार्ता हुई और इस बात पर सहमति बनी की पुलिस को जांच के लिए साथ दिन का समय दिया जाए। सात दिन में पुलिस जांच कर आगे की कार्रवाई करेगी। इसके बाद धरना खत्म कर पोस्टमार्टम कराया गया। विधायक कमलेश्वर डोडियार ने चेतावनी दी कि सात दिन में जांच कर एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
             पटवारी संघ 23 अप्रैल को ज्ञापन देगा
    पुलिस थाने पर धरना प्रदर्शन के दौरान पटवारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पाटीदार ने कहा कि पटवारी के पत्र में देखा होगा कि उसमें लिखा था कि बंटाकन की कोई फाइल थी. उसमें  गलत तरीके से दूसरे पक्ष में रिपोर्ट लगाने के लिए, चूंकी हम एक पटवारी हैं और विधान है, हमारी एमपीएलआरसी है, उसके अनुरूप ही जो रजिस्ट्री हैं, उसके अनुसार ही बंटाकन काटकर देते है। वो अवैध तरीके से दूसरे व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए रिपोर्ट बनवाना चाह रही थी और पटवारी ने मनाकर दिया। अनावश्यक दबाव बनाने के लिए पटवारी के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों को लिखने के लिए कहा गया। निलंबित करा दूंगी,  इस प्रकार के नायब तहसीलदार दबाव बनी रही थी। सगे भाई की शादी है, उसमें वह नहीं जा पहा रहा है, सोच सकते हैं कि उसके कितनी मानसिक प्रताड़ना दी गई। अधिकारी कह रहे है कि नायब तहसीलदार, तहसीलदार को निलंबित करने का अधिकार कलेक्टर का नहीं होता है,  हमारा कहना है कि  जब रात में फाइल चलके अनोमोदन होकर निलंबन हो सकता है, तो नायब तहसीलदार निलंबित क्यों नहीं हो सकता, जबकि इतना गंभीर मुद्दा है, हमारे एक साथी की जान चली गई और वे कह रहे है कि निलंबित अभी नहीं कर सकते और एफआईआर भी हो सकती है। अधिकारी को बचाने के चक्कर में ये कुछ कार्रवाई नहीं करना चाहते। मेडिकल कॉलेज में धरना समाप्त होने के बाद पाटीदार ने चर्चा करने पर बताया कि थाना प्रभारी ने जांच के लिए सात दिन का समय मांगा है। हम 23 अप्रैल को दोपहर कलेक्टर को ज्ञापन देकर दो दिन में जांच कर कार्रवाई की मांग करेंगे। एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
    विधायक ने की मांग विशेष जांच दल गठित किया जाए
   विधायक कमलेश्वर डोडियार ने एसपी अमित कुमार को पत्र लिखकर पटवारी की आत्महत्या के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए। उन्होंने पत्र में लिखा है कि मृतक पटवारी के पास से मिले पत्र व प्राप्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि नायब तहसीलदार द्वारा पटवारी को निरंतर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मृतक पटवारी के लेटर आदि के संबंध में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है, जिससे जांच पर प्रश्न चिंह खड़ा होता है, जांच प्रभावित करने के संदेह के आधार पर संबंधित थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। मृतक के लिखे पत्र, कॉल डिटेल व अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर जांच में शामिल किया जाए। यह प्रकरण न केवल एक व्यक्ति की मृत्यु का है बल्कि प्रशासनिक दबाव व भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों को भी उजाकर करता है।