विधायक कमलेश्वर डोडियार व उनके साथियों पर एफआईआर दर्ज, बगैर अनुमति रैली निकालकर किया था धरना प्रदर्शन
- -विधायक ने कहा मेल से दी थी सूचना, लोकतांत्रिक तरीके से जनता की समस्याएं उठाने पर एफआईआर की कार्रवाई करना दुर्भाग्यपूर्ण
✍ सर्च इंडिया न्यूज, रतलाम।
खाद-बीज, बिजली, पानी सहित अनेक मुद्दों को लेकर भारती आदिवासी पार्टी (बाप) द्वारा रैली निकालकर किए गए धरना प्रदर्शन के मामले में स्टेशन रोड पुलिस ने सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार व जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा सहित पार्टी के अनेक नेताओं पर एफआईआर दर्ज है। आरोप है कि उनके द्वारा बगैर अनुमति के प्रदर्शन किया गया था और प्रदर्शन के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर, मामले में विधायक कमलेश्वर डोडियार का कहना है कि उन्होंने एक दिन पहले ही ई-मेल के माध्यम से प्रशासन को सूचना दी थी। राजनैतिक द्वेषता के चलते एफआईआई दर्ज की गई है। लोकतांत्रिक तरीके से जनता की समस्याएं उठाने पर इस तरह की कार्रवाई करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उल्लेखनीय है कि भारत आदिवासी पार्टी द्वारा 24 जून 2026 को किसानों व ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं व मांगों को लेकर जन आक्रोश रैली निकाली गई थी। विधायक व कार्यकर्ता रैली के माध्यम से कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन देना चाहते थे। इसके लिए विधायक कमलेश्वर डोडियार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा और सैकड़ों कार्यकर्ता बंजली बायपास तिराहा पर एकत्र हुए और वहां से रैली निकालने वाले थे। प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने वहां पहुंचकर उनसे रैली निकालने की बजाय वहीं पर ज्ञापन सौंपने के संबंध में चर्चा की थी, लेकिन वे कलेक्टर कार्यालय जाकर कलेक्टर को ही ज्ञापन देने पर अड़े रहे। दोपहर करीब दो बजे विधायक व पार्टी कार्यकर्ता पैदल रैली लेकर वहां से रवाना हुए और नारेबाजी करते हुए कोर्ट चौराहा पहुंचे तो प्रशासन ने वहां रैली रोकने का प्रयास किया था लेकिन कार्यकर्ता बैरिकेट्स हटाते हुए आगे बढ़ गए थे। इस दौरान पुलिस व कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई थी। इसके बाद रैली जब कलेक्टर कार्यालय गेट पर पहुंची तो वह पुलिस ने बैरिकट्स लगाकर रास्ता रोक दिया था और किसी को भी कलेक्टर कार्यालय परिसर में नहीं जाने दिया था। इससे नाराज विधायक व कार्यकर्ता सड़क पर धरना देकर बैठ गए थे और नारेबाजी करते हुए कलेक्टर को वहां बुलाने की मांग करने लगे थे। करीब एक घंटे तक धरना प्रदर्शन चला था। इसी बीच अधिकारियों ने कहा था कि कलेक्टर आफिस में नहीं है। तब शाम पांच बजे विधायक कमलेश्वर डोडियार ने अपर कलेक्टर को 48 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपकर धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया था।
कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति निर्मित हुई
जिला प्रशासन की तरफ से 25 जून 2026 को स्टेशन रोड थाने पर आवेदन भेजकर एफआईअर कराई गई। आवेदन में कहा गया है कि आए दिन रतलाम शहर में बिना अनुमति के प्रतिबंधित मार्गों पर विभिन्न आयोजन रैली, जुलूस, धरना प्रदर्शन आदि किए जाते है। इससे जनता परेशान होती है और यातायात बाधित होता है। इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया गया है। उक्त आदेश का आरोपियों ने 24 जून 2026 को उल्लंघन किया है, जिससे शहर में कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति निर्मित हुई। सड़क जाम होने से जनता को असुविधा हुई। कोर्ट चौराहा पर बलपूर्वक बैरिकेड्स गिराकर भय की स्थिति निर्मित की गई। एसडीएम के आदेश का उल्लंघन किया। प्रशासन के आवेदन पर पुलिस ने विधायक कमलेश्वर डोडियार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा, शरद डोडियार, दिनेश माल व अन्य आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 223 (ए) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
विधायक बोले एफआईआर से नहीं डरेगे
एफआईआर दर्ज होने के मामले में विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि पार्टी शुरू से आदिवासियों, किसानों व मजदूरों और आम जनता के अधिकारियों की लड़ाई लड़ती आई है। आगे भी यह संघर्ष जारी रहेगा। एफआईआर से डरेगे नहीं, जनता के मुद्दों को लेकर पार्टी सड़क से सदन से अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। एफआईआर झूठी व राजनैतिक द्वेष प्रेरित है। लोकतांत्रिक तरीके से जनता की समस्याओं को उठाने पर इस प्रकार की कार्रवाई करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस प्रकार की कार्रवाई से पार्टी कार्यकर्ता व साथी डरने वाले नहीं है। इसके विपरीत, इससे उनका मनोबर और अधिक मजबूत होगा तथा वे जनता के हितों लिए पहले से अधिक मजबूती के साथ संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि रैली व ज्ञापन के संबंध में एक दिन पहले उन्होंने सूचना शासकीय मेल आईडी पर कलेक्टर को भेज दी थी। इसके बावजूद दुर्भावना से प्रकरण दर्ज किया गया। हमें अनुमति मांगने का मौका दे सकते थे। प्रशासन मेरे विशेषाधिकारों का हनन कर रहा है। क्या विधायक होते हुए प्रशासन से मिलने की अनुमति लेना होगी? एफआईआर दर्ज करने से साफ है कि प्रताड़ित लोगों के साथ प्रशासन समस्याओं के निराकरण की जगह समस्याओं का कारण बन रही है।